सीखें : छोटे बच्चों को क्रिएटिव कैसे बनायें ?
सीखने के लिए रूचि पैदा करें
बच्चे अक्षरों से नहीं जुड़ पाते क्योंकि उन्हें इनसे भावनात्मक या अनुभवात्मक जुड़ाव नहीं होता, ABC और 123 बच्चों के लिए “सूखे” और “अर्थहीन” लगते हैं। उनमें कोई मज़ा, कहानी, अनुभव या खेल नहीं होता। बच्चा सिर्फ देखता है कि A लिखा है, लेकिन उसे समझ नहीं आता कि “A उसका क्या है?”, जबकि खिलौनों, चित्रों या खेलों से उनका सीधा संबंध होता है, इसलिए वे खिलौने खेलना ज्यादा पसंद करते हैं, खिलौनों का चित्र बनाते हैं लेकिन पढने लिखने से कतराते हैं। इसके कुछ आसन समाधान है ये :-
भाषा ज्ञान : LSRW Technique : Listening > Speaking > Reading > Writing
LSRW का मतलब होता है: Listening (सुनना), Speaking (बोलना), Reading (पढ़ना), Writing (लिखना)
- Listening (सुनना)
- बच्चों को भाषा सबसे पहले सुननी चाहिए।
- उदाहरण : कहानी सुनाना, कविता सुनाना, ऑडियो सुनवाना।
- कैसे सिखाएं :रोज़ 5–10 मिनट की कविता या कहानी सुनाएं।
- आसान शब्दों को बार-बार दोहराएं।
- सुनने के बाद सवाल पूछें जैसे: “कहानी में कौन था?”, “क्या हुआ था?”
- Speaking (बोलना)
- सुनने के बाद बच्चा बोलना शुरू करता है।
- बच्चों से बोलने को कहें – जैसे “नमस्ते”, “मेरा नाम ……. है।
- खेल-खेल में बातचीत कराएं – “इसमें क्या रंग है?”, “कितने सेब हैं?”
- एक शब्द बोलें, बच्चा दोहराए।
- Reading (पढ़ना)
- जब बच्चा थोड़ा बोलने लगे, तो उसे पढ़ना सिखाएं।
- चित्रों के साथ शब्द दिखाएं (जैसे “सेब” के साथ सेब की तस्वीर)।
- रंग-बिरंगी किताबों से पढ़ना शुरू कराएं।
- बच्चे को अक्षरों को पहचानना सिखाएं – अ, आ, क, ख…
- Writing (लिखना)
- आखिरी स्टेप है लिखना।
- पहले लाइन पर चलाना सिखाएं।
- फिर अक्षर बनाना सिखाएं (जैसे “अ” कैसे लिखते हैं)।
- शब्दों की नकल करने को कहें (Copy Work)।
- बाद में खुद से शब्द लिखवाना शुरू करें।
अक्षर ज्ञान : ELPS Technique : Experience, Language, Picture, Symbol
- “कनेक्शन आधारित शिक्षण” – बच्चों को अक्षरों से जोड़ने के आसान उपाय*
- समाधान: ABC/123 को खेल और भावनाओं से जोड़ें, A, B, C को खिलौनों या कहानियों से जोड़ें
- “A for Apple” नहीं सिर्फ कहने से कुछ नहीं होगा। उसे Apple का खिलौना दो, सेब खिलाओ, सेब की कहानी सुनाओ।
- A for Apple 🍎 : बच्चा खुद सेब छुए, खाए, रंग भरे, कहानी सुने: “एक लाल सेब था जो पेड़ से गिरा…”
- B for Ball ⚽: बच्चा बॉल से खेले, बॉल की बाउंसिंग देखे।
- C for Cat 🐱 : एक प्यारी सी बिल्ली की कहानी या म्याऊ की आवाज़ सुनाओ। ऐसा करने से बच्चा शब्द → वस्तु → भावना से जुड़ता है।
- Letters को चित्रों के आकार से जोड़ें
- “A” को दिखाओ जैसे “Tent” या “Mountain”
- “B” को दिखाओ जैसे “Two bubbles” या “Baby’s tummy”
- “C” को दिखाओ जैसे “Half-eaten Cookie”
- फिर बच्चों से कहो – “A को रंग दो जैसे ये तंबू है”, “B को दो गोले दे दो”, आदि।
- Alphabet Story Time – अक्षरों की कहानी बनाओ
- A – ऐनी Apple | ऐनी एक पेड़ पर रहती थी
- B – बबलू Ball | बबलू इधर-उधर उछलता था
- C – चीकू Cat | चीकू एक प्यारी बिल्ली थी
- बच्चे कहानी सुनते-सुनते अक्षर से भावनात्मक रूप से जुड़ते हैं।
- Alphabet Toys & Tracing Play (अक्षर आधारित खलौने)
- ABC और 123 के टॉय लैटर्स (प्लास्टिक, वुडन) बच्चों को दें, उनसे शब्द बनवाएं।
- रेत, आटे या रंगीन रेत में ट्रेस कराएं।
- फिंगर पेंटिंग से A, B, C लिखवाएं।
- ये सब बच्चे के लिए अक्षर को “खेल” बना देंगे।
- Game-Based Learning ( खेल खेल में सीखें )
- ABC बास्केट – सही अक्षर को सही खिलौने की टोकरी में डालो |
- Letter Hunt – घर में A, B, C की चीज़ों को खोजो |
- Trace & Race – बोर्ड पर A लिखो, फिर दौड़ लगाओ |
- परिणाम : बच्चा A, B, C को “देखने” से ज़्यादा “महसूस” करेगा।
- अक्षरों से उसका रिश्ता बनेगा — जैसे खिलौनों से बनता है।
- सीखना मज़ेदार होगा, मजबूरी नहीं।
अक्षर ज्ञान : SSS Technique : Shape, Size, Symbol
SSS एक मजेदार तरीका है जिसमें बच्चे *आकार (Shape), आकार का माप (Size)* और *चिह्न (Symbol)* से कनेक्शन बनाकर शब्दों को पहचानते और याद रखते हैं।
- S – Shape (आकार)
- हर अक्षर या शब्द का एक आकार होता है।
- “अ” कैसा दिखता है? “गोल है या सीधा?”
- चित्र बनाकर अक्षर से जोड़ें – जैसे “O” दिखता है गोल, जैसे संतरा।
- S – Size (आकार का माप)
- शब्द छोटे-बड़े हो सकते हैं।
- Capital और small letters दिखाएं (A – a)
- बड़ा अक्षर कहाँ आता है? (जैसे नाम के शुरू में Capital)
- S – Symbol (चिह्न/प्रतीक)
- अक्षर और शब्द एक प्रतीक की तरह होते हैं।
- जैसे “❤” दिल को दर्शाता है, वैसे ही “M” माँ के लिए हो सकता है।
- बच्चों से कहें – “A मतलब Apple 🍎”, “B मतलब Ball ⚽”
- जब बच्चा *Shape, Size और Symbol* को पहचानना सीखता है, तब वह आसानी से शब्दों को याद रख सकता है।
- बच्चे को अक्षर और चित्रों को जोड़ना सिखाएं।
- फिर शब्द बनाने सिखाएं – जैसे A से Apple, B से Ball, C से Cat
लेखन पूर्व अभ्यास
बच्चों को लिखना सिखाने से पहले उनकी उंगलियों, कलाई और हाथों की *मोटर स्किल्स (Fine Motor Skills)* को मजबूत करना ज़रूरी होता है। अगर ये स्टेप्स सही से कराए जाएं, तो बच्चे का हाथ अच्छे से घूमता है और वो सुंदर अक्षर लिख सकता है।
✍ लिखने की तैयारी (Pre-Writing Skills) में 3 बातें आती हैं:
- मोटर कंट्रोल (Motor Control) – हाथ की पकड़ और चलाने की ताकत
- आँख-हाथ का समन्वय (Hand-Eye Coordination)
- ध्यान और धैर्य (Focus & Patience)
- हाथ की पकड़ और उंगलियों की ताकत बढ़ाना (Finger Strength) > बच्चा पेंसिल पकड़ने से पहले उसकी उंगलियाँ मज़बूत होनी चाहिए।
- आटे से आकृति बनवाना (मिट्टी/Play-dough)
- कपड़े की क्लिप लगवाना
- बटन खोलना-बंद करना
- मोती पिरोना (Bead Threading)
- अखरोट या नींबू निचोड़ने का खेल
- हाथ घुमाने की गतिविधियाँ (Wrist & Arm Movement) > कलाई और बाज़ू को घुमाने से लिखाई में गति आती है।
- बोर्ड पर बड़ा-बड़ा गोल घुमाना
- दीवार पर रंग भरवाना
- झाड़ू/पोछा लगाना (खेल-खेल में)
- रेसिंग गेम: “कौन पहले गोल घुमा पाए”
- रेखा अभ्यास (Pre-Writing Lines Practice) > अक्षर लिखने से पहले *सीधी, टेढ़ी, घुमावदार, ज़िकज़ैक रेखाएं* बनाना सिखाएं।
- सीधी लाइन
- खड़ी लाइन
- तिरछी लाइन
- घुमावदार लाइन (◯, S, झूला)
- ज़िकज़ैक (M, W जैसे)
- पेंट ब्रश से पानी में बनवाना
- उंगलियों से रेत/आटे पर बनवाना
- कागज पर रंगीन डॉट्स को जोड़ना
- आँख और हाथ का तालमेल (Hand-Eye Coordination) > बच्चा जहाँ देखे, वहाँ हाथ भी चलाए – यह बहुत जरूरी है।
- “डॉट्स को जोड़ो”
- भूल-भुलैया खेल
- स्टिकर लगाना
- ट्रेसिंग (Tracing) – बिंदी या डॉट पर चलाना
- पेंसिल पकड़ना और चलाना सिखाना (Correct Pencil Grip) > शुरुआत में मोटी क्रेयॉन या स्लांट बोर्ड इस्तेमाल करें ताकि पकड़ सही बने।
- 3-Finger Hold: अंगूठा + पहली 2 उंगलियाँ
- छोटी पेंसिल या क्रेयॉन से शुरुआत करें
- बड़ी से छोटी जगह पर लिखने का अभ्यास> पहले बड़ा फॉर्मेट, फिर छोटा: > *दीवार → फ्लोर → A3 पेपर → कॉपी*
- लिखना नहीं, “Art & Pattern” के रूप में सिखाएं > बच्चा जब पेन/पेंसिल से Patterns बनाता है (जैसे: 🌈, 🌀, ○, │, \~), तो वो बिना दबाव के सीखता है।